नेत्रहीनों की दुनिया

“आँखें हैं तो जहाँ है..”

इस दुनिया को देख पाना इन आँखों से ही सम्भव है

यह दुनिया कितनी ख़ूबसूरत है.. अच्छी है या बुरी है, इन सब बातों का पता आँखों द्वारा ही चलता है..शरीर की सुंदरता में चार चाँद लगाती है ये आँखें।

सोचिए, जिनकी आँखें नहीं है वो कैसे जीते हैं। आँखें ना होने की कितनी टीस होती होगी उन्हें। वो सिर्फ़ इस दुनिया को महसूस कर पाते हैं। आँखों का महत्व भी वही बता पाते हैं जिनकी आँखें नहीं है..

लेकिन आज के कुछ बुद्धिजीवियों ने इन नेत्रहीनों की तरफ़ ध्यान देना शुरू किया है। यह बुद्धिजीवी, अपने जीतेजी, अपनी आँखों को, उन संस्थाओं को दान में दे जाते है, जो संस्थाएँ उनकी मृत्यपरांत उनकी आँखों को उन लोगों को लगाती है, जिनके नेत्र नहीं है। इस तरह से एक इंसान की दो आँखों से दो नेत्रहीनों की ज़िंदगी में उजाला आ जाता है।

22 Comments

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