और भी हैं राहें

और भी हैं राहें
जरा मुड़ कर तो देखिये
अरमान होंगे पूरेे
विश्वास करके तो देखिये

खुशियाँ मिलेंगी सारी
गम भुला कर तो देखिये
किनारा भी मिेलेगा जरूर
कदम बढ़ा कर तो देखिये

जीत भी होगी हर कदम
हार पा कर तो देखिये
अनगिनत तारे होंगे इर्द-गिर्द
चाँद बन कर तो देखियेे

मंजिलेंं होंगीं सुलभ
सपने देेखा तो कीजियेे
लिखना भी आ जायेगा
कागज-कलम उठा कर तो देखिये

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