काश…

काश…,जिंदगी भी
खिली-खिली धूप होती
हर रोज खुशी और
मौज-मस्ती होती

चारों ओर हँसी के
ठहाकेे होते
हँसते-खिलखिलाते कई
नजारेे होते

मौसम भी होता
शायराना
मुशायरों का
दौर होता

हास्य-कवियों का
होता जमावडा़
हँसी के जश्न का
माहौल होता

हँसी के इस जश्न में
सभी होते शामिल
अपनी-अपनी कहने को
होते व्याकुल

काश जिंदगी भी
खिली-खिली धूप होती
हर रोज खुशी और
मौज-मस्ती होती

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