बसंत-पंंचमी

आज बसंत-पंचमी है। बसंत-पंचमी का त्यौहार हर वर्ष माघ मास की शुक्ल-पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। यह त्यौहार बसंत ऋृतु मेंं आता है। अतः इसे बसंत-पंचमी कहते है
आज का दिन विद्या की देवी सरस्वती का जन्म दिन है। क्योंकि माँ सरस्वती विद्या की देवी हैं इसलिये सभी विद्यालयों में आज के दिन माँ सरस्वती की पूजा होती है। पूजा में पीले या नारंगी रंग के फल और फूल चढ़ाये जाते हैं। सभी विद्यार्थी, शिक्षक, शिक्षिकायें बसंती परिधानों में होते हैं। ऐसा लगता है जैसे सर्वत्र स्वर्णिम आभा बिखरी हुई हो।

विद्या की देवी सरस्वती चूँकि शान्ति-प्रिय हैं। उनका श्वेत रंग का परिधान भी शान्ति का परिचायक है। माँ सरस्वती को वीणा वादन पसंद है। अतः उन्हें वीणा वादिनी , वीणा धारिणी भी कहा जाता है।

माँ सरस्वती कमल के फूल पर विराजती हैं। इसलिये उनका आसन कमलासन कहलाता है। आईये हम सब मिलकर उनका गुणगान करें—-

जयति जय जय माँ सरस्वती
जयति वीणा धारिणी
शान्ति का दरिया बहा दे
जयति शुभ फल दायिनी
जयति जय जय माँ सरस्वती

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